
शनिवार को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं.
गुरुद्वारा बंगला साहिब से जंतर-मंतर तक मार्च निकालने की कोशिश कर रहे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया.
नेहा बोरा समेत सीजेपी और विपक्ष के कई नेताओं को भी हिरासत में लिया गया.
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठीचार्ज करने और उनके साथ सख़्ती बरतने के आरोप लगाए. कनॉट प्लेस में प्रदर्शनकारियों को ले जा रही एक बस को वकील ने रोका, जिसके बाद कई प्रदर्शनकारी बस से उतरकर भाग निकले.
सवाल ये है कि महज़ पांच महीने पहले अस्तित्व में आए युवाओं के एक संगठन ने ऐसा क्या किया कि शनिवार को दिल्ली में एसआईआर के ख़िलाफ़ हुए प्रदर्शन से पहले सरकार को इतने बड़े पैमाने पर सुरक्षा इंतज़ाम करने पड़े?
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़, कॉकरोच जनता पार्टी के इस प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली में शुक्रवार शाम तक अभूतपूर्व सुरक्षा इंतज़ाम किए गए थे. कम से कम 30,000 पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ राजधानी को बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में बदल दिया गया.
इनमें जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाक़ों से बुलाए गए जवान भी शामिल हैं. जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस स्थिति को दिल्ली में कश्मीर मॉडल का लागू किया जाना बताया है.